भारत की पहचान इंसानियत, बराबरी और सेवा की रही है। यह वही देश है जिसने मज़हब से ऊपर उठकर दुनिया को मानवता का संदेश दिया। समाजशास्त्रियों का कहना है कि अगर नफ़रत की यह आग फैलती रही तो चिकित्सा जैसी पवित्र सेवा भी प्रभावित होगी।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले मे प्रसव पीड़ा से जूझ रही शमा परवीन को परिवारजन जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन कई घंटों बेड पर तड़पते छोड़ दिया गया। ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर ने इलाज से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि, “तुम मुसलमान हो, हम इलाज नहीं करेंगे।”
यह आरोप केवल एक अस्पताल या एक डॉक्टर पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि उस सोच पर भी सवाल खड़ा करता है जिसमें इंसानियत से पहले मज़हब देख लिया जाता है। यह समय नफ़रत को रोकने और इंसानियत को मजबूत करने का है। क्योंकि यह देश नफ़रत का नहीं, बल्कि मोहब्बत और सह-अस्तित्व का प्रतीक रहा है।
