ये उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप हैं, सच दिखा रहे थे, मार दिए गए। भ्रष्टाचार और अस्पतालों की बदहाली उजागर कर रहे थे। इसके बाद से उन्हें धमकियाँ मिलनी शुरू हो गई थीं।
कुछ दिन से लापता थे, जोशियाडा बैराज से उनका शव मिला है।
पत्नी का साफ आरोप है, “ये हादसा नहीं, उन धमकियों का अंजाम है।”
जब मीडिया का बड़ा हिस्सा सत्ता की गोद में बैठकर दलाली और डर का कारोबार कर रहा है, तब जो पत्रकार सच्चाई दिखाने की हिम्मत करते हैं, उन पर सबसे ज़्यादा सरकार का डर और दबाव होता है।
राजीव प्रताप की मौत सिर्फ़ एक शख़्स की मौत नहीं है, यह उस माहौल की तस्वीर है जहाँ सच बोलने वाला सबसे असुरक्षित है।
