मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। गंदा पानी पीने के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं और अब तक 35 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना ने शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि प्रभावित इलाकों में एहतियातन 40,000 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच कराई गई है। जांच के दौरान 2,456 लोगों में संदिग्ध लक्षण पाए गए, जबकि 212 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 50 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि 162 मरीजों का इलाज अभी जारी है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है।
मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों से मुलाकात की और इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। दूषित पानी से जुड़ी शिकायतों वाले सभी इलाकों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि जल आपूर्ति के स्रोतों की तुरंत तकनीकी जांच की जाए, दूषित पाइपलाइन या टंकियों की पहचान कर उन्हें बंद किया जाए और प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार घर-घर जाकर सर्वे और निगरानी कर रही हैं।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार और कड़े प्रावधान लागू किए जाएंगे। फिलहाल पूरे इलाके में अलर्ट जारी है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
