मध्य प्रदेश में 31 हजार सरकारी स्कूल बंद, क्या अंधेरे में धकेला जा रहा है भविष्य?

पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। सरकारी आंकड़ों और विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में अब तक करीब 93,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, जिनमें से 31,000 स्कूल अकेले मध्य प्रदेश में बंद किए गए हैं। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं है, बल्कि उस…

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भारत में ChatGPT का बढ़ता असर: 10 करोड़ वीकली यूजर्स के साथ बना दूसरा सबसे बड़ा बाजार

ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पहले बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भारत में हर हफ्ते करीब 10 करोड़ लोग चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही भारत, अमेरिका के बाद चैटजीपीटी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है। भारतीय छात्र सबसे…

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बरलाई सहकारी शक्कर कारखाने की जमीन निजी हाथों में देने से किसान नाराज़ दी आंदोलन की चेतावनी

मध्यप्रदेश के सांवेर तहसील की बरलाई शुगर मिल वर्ष 1974-75 में आसपास के गांवों के किसानों ने अपनी मेहनत की कमाई से 1000 रुपये देकर शेयर लिया था और इस सहकारी शक्कर कारखाने की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस दौर में किसानों को भरोसा दिलाया गया था कि यह मिल उनके भविष्य को…

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डिजिटल दुनिया में उलझे गांव, असल रिश्ते हो रहे कमजोर

आज गांवों की गलियों में जो बदलाव सबसे तेज़ी से दिख रहा है, उसकी वजह मोबाइल फोन है। कभी गांवों की पहचान आपसी मेल-जोल, भरोसे और रिश्तों की मज़बूती से होती थी, आज वही रिश्ते शक, तुलना और दिखावे की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। मोबाइल की यह “विजय” गांवों के युवाओं से लेकर शादीशुदा…

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वायरल से गुमनामी तक: ‘दिल ना दिया’ गाकर मशहूर हुआ पिंटू, अब इलाज की आस में

सोशल मीडिया पर रातों-रात चमकने वाले चेहरों की दुनिया उतनी ही बेरहम भी है। जो नाम कल तक हर स्क्रीन पर छाया रहता है, वही आज भीड़ के शोर में खो जाता है। ऐसा ही एक नाम है पिंटू—वह लड़का, जिसने “कृष का गाना सुनेगा… दिल ना दिया, दिल ना दिया ले बेटा” गाकर इंटरनेट…

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राहुल पटेल: मेहनत, स्वाभिमान और सवाल पूछने की हिम्मत

मध्य प्रदेश के इंदौर से लगे गांव डकाच्या के राहुल पटेल कोई बड़ा नेता नहीं है, न ही किसी बड़े मंच का चेहरा। वह एक आम युवक है, जिसने एमबीए की पढ़ाई की, लेकिन नौकरी के पीछे भागने की बजाय ईमानदारी से मेहनत का रास्ता चुना। आज वह पोहे की एक छोटी-सी दुकान लगाकर अपने…

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जोशी सर: चार दशक की शिक्षा, सेवा और संस्कारों की मिसाल

ग्राम डकाच्या में पिछले 40 वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे हेमंत जोशी केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक पूरे गाँव की यादों, संस्कारों और भविष्य का हिस्सा हैं। बच्चे हों या अभिभावक—सब उन्हें स्नेह और सम्मान से “जोशी सर” के नाम से जानते हैं। उनकी पहचान किसी पद या पुरस्कार से नहीं, बल्कि…

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लखन पटेल: एक ऐसा सरपंच जिसे राजनीती नहीं, ‘जन-नीति’ में यकीन है

ग्राम डकाच्या के सरपंच लखन पटेल का नाम सुनते ही मन में एक ऐसे व्यक्ति की छवि उभरती है, जो छल-प्रपंच की राजनीति से कोसों दूर, सादगी और ईमानदारी की मिसाल कायम करते हैं। उनकी पहचान सत्ता के दिखावे या नेतागिरी के अहंकार से नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े सेवाभाव और गाँव के प्रति समर्पण से बनती है। लखन पटेल…

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शहर में बढ़ता प्रदूषण

रोहित ने सुबह खिड़की खोली तो सांस लेने में दिक्कत हुई। बाहर का नज़ारा धुंधला था, जैसे किसी ने पूरे शहर पर मटमैला चश्मा चढ़ा दिया हो। आसमान नीला नहीं, भूरे-पीले रंग में डूबा हुआ था। दूर के इमारतों के किनारे धुंध में मिल रहे थे। सड़क पर निकला तो गला खराब होने लगा। वाहनों…

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नशे की जकड़ में गाँव की जवानी

रामू की उम्र सिर्फ उन्नीस साल थी, लेकिन उसकी आँखों में जवानी की चमक नहीं, एक धुंधली सूनापन था। गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे, जहाँ कभी बच्चे खेलते थे और बुजुर्ग गप्पें मारते थे, अब नशे के अड्डे बन गए थे। शाम ढलते ही वहाँ इकट्ठा होने वाली नौजवान टोली की बातों…

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