हंसराज मंडलोई: संघर्ष की बुलंद आवाज़

हंसराज मंडलोई कोई चमक-दमक वाला राजनीतिक चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे उस आम आदमी की आवाज़ हैं जो रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझता है। उनकी राजनीति सत्ता की कुर्सी से नहीं, सड़क से शुरू होती है—वहीं से, जहाँ सवाल उठते हैं और जवाब मांगने पड़ते हैं। हंसराज ने हमेशा आम लोगों के मुद्दों को प्राथमिकता…

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पंचायत चुनाव: लोकतंत्र निभाएँ, रिश्ते न बिगाड़ें

गाँव की पहचान सिर्फ़ खेत-खलिहान, मिट्टी और मेहनत से नहीं होती, बल्कि आपसी रिश्तों, भाईचारे और सहयोग से होती है। लेकिन दुर्भाग्य से जब गाँव में पंचायत चुनाव आते हैं, तो यही रिश्ते सबसे ज़्यादा परीक्षा में पड़ जाते हैं। जो लोग कल तक एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे, वही चुनाव के…

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