हर उम्र में बदलती हुई एक फ़िल्म

एक फ़िल्म, तीन हिस्से और एक ज़िंदगी बचपन से “मेरा नाम जोकर” फ़िल्म से मेरी क़रीबी रही है. यह क़रीबी किसी एक बार देखने से नहीं बनी, बल्कि धीरे-धीरे, उम्र के साथ गहरी होती चली गई. मेरे पिता ने मेरे जन्मदिन पर मुझे इस फ़िल्म की सीडी लाकर दी थी. उस सीडी में फ़िल्म तीन हिस्सों…

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