ब्रेकिंग न्यूज़

गाँव की झिझक से मुंबई की बेबाकी तक…

सरकारी स्कूल से पढ़ा हूँ। 9वीं कक्षा से लड़कियाँ भी साथ पढ़ने लगी थीं (Co-ed)। वैसे लड़कियाँ कम ही थीं, गाँव का माहौल सख्त था, न वो बात करतीं, न हम। शुरुआत की पाँच लाइनों में लड़के, आख़िरी की दो लाइनों में लड़कियाँ बैठा करती थीं, वो भी लड़कों से दस हाथ दूर। न बात,…

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हिट गानों से गुमनामी तक, अनवर की अधूरी कहानी

70 से 90 के दशक के बीच हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसी आवाज़ गूंजी, जो सुनते ही दिल ठहर जाता था। ये आवाज़ थी Anwar Hussain की, एक ऐसा नाम, जो कभी हर दूसरे रेडियो और कैसेट प्लेयर पर सुनाई देता था। अनवर की सबसे बड़ी पहचान उनकी आवाज़ थी। इतनी साफ, इतनी मुलायम…

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70 साल बाद अपने गांव लौटे Gulzar, बदली तस्वीर ने तोड़ दिया दिल

70 साल बाद जब मशहूर गीतकार Gulzar पाकिस्तान के Dina में अपने गांव लौटे, तो जो उन्होंने देखा, उसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। जहां कभी कच्चे घरों में ज़िंदगी बसती थी, जहां पेड़-पौधों की छांव में अपनापन पलता था, वहां अब सब कुछ बदल चुका था। पुराने लोग अब सिर्फ यादों में रह गए…

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जब साँस लेना भी लग्ज़री बन जाए

दस साल पहले की बात है। हर सुबह सूरज निकलने से पहले मैं अपने जूते बाँधती थी और खुद को कार्टर रोड की तरफ जाते हुए पाती थी। समुद्र की ठंडी हवा मेरे चेहरे से टकराती थी, जैसे कोई चुपचाप हौसला दे रहा हो। वही हवा थी, जिसने मुझे इस शहर से और दौड़ने से…

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1992 का वो समय… और रघुनाथ काका की ब्रेड

सुबह की चाय या तो सूखी रोटी के साथ होती थी, या फिर पराठा–पूरी के संग। गाँव में हर चीज़ आसानी से नहीं मिलती थी।और तभी, भोपु के बीच एक आवाज़ गूँजती—“ब्रेड ले लो…” बस, इतना सुनते ही दिल धड़क उठता।नंगे पाँव दौड़ पड़ते थे हम सब… रघुनाथ काका की ब्रेड लेने। रघुनाथ काका…हर मौसम…

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हर उम्र में बदलती हुई एक फ़िल्म

एक फ़िल्म, तीन हिस्से और एक ज़िंदगी बचपन से “मेरा नाम जोकर” फ़िल्म से मेरी क़रीबी रही है. यह क़रीबी किसी एक बार देखने से नहीं बनी, बल्कि धीरे-धीरे, उम्र के साथ गहरी होती चली गई. मेरे पिता ने मेरे जन्मदिन पर मुझे इस फ़िल्म की सीडी लाकर दी थी. उस सीडी में फ़िल्म तीन हिस्सों…

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लोकगीतों की जीवित विरासत: शिवनारायण चौधरी

शिवनारायण चौधरी, यह नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गाँव की लोक-संस्कृति की जीवित धरोहर का प्रतीक है। बीते 60 वर्षों से वे गाँव-गाँव घूमकर लोकगीत गा रहे हैं। खेतों की मेड़ों, मेलों की रौनक, शादी-ब्याह के आँगन और फसल कटाई की थकान, हर जगह उनकी आवाज़ ने लोगों के दिलों को जोड़ा है।…

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गाँव से शहर तक – यादों की गठरी

सुबह का धुंधलका था। पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा वह आख़िरी बार अपने गाँव को देख रहा था। मिट्टी की सोंधी खुशबू, कुएँ से खींचे पानी की आवाज़, और माँ के आँगन में बिखरे तुलसी के पत्ते, सब कुछ उसकी आँखों में उतर आया। शहर जाना उसकी मजबूरी थी, पर गाँव छोड़ना उसके दिल…

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अभिनेत्री मधुबाला के किस्से कहानियां…

भारतीय सिनेमा की बेहद खूबसूरत अदाकारा मधुबाला के जीवन से जुड़े कुछ किस्से कहानियां, कैसे खूबसूरत अभिनेत्री का कॅरियर रहा, प्यारा में दिल टुटा, फिर बीमारी से हारी इन सभी बातों को जानने के लिए यह वीडियो जरूर देखें।

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मिलिए TVF की चर्चित वेब सीरीज ‘संदीप भैया’ के प्रिंस मिश्रा यानि की पुनीत तिवारी से

झारखण्ड के रहने वाले अभिनेता पुनीत तिवारी ने TVF की वेब सीरीज ‘संदीप भैया’ में प्रिन्स मिश्रा का मजेदार किरदार निभाया है प्रिंस मिश्रा को बड़ा सराहा जा रहा है…

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