हिन्दी भाषी प्रदेश झूठ और भ्रम की इतनी जकड़ में है कि ताजमहल को हिंदू मंदिर मानने जैसा अजीबोगरीब भ्रम भी सच मान लेगा। 2014 के बाद का भारत तथ्य और वास्तविकता से पूरी तरह कट चुका है। ऐसे माहौल में परेश रावल जैसे सदाबहार और बहुमुखी अभिनेता का अपने करियर को इन प्रचारपूर्ण फ़िल्मों तक सीमित कर लेना निराशाजनक है, खासकर तब जब दर्शक इन्हें असफल और नापसंद कहानियों की तरह खारिज करने लगे हैं।
हिन्दी भाषी प्रदेश झूठ और भ्रम की जकड़ में है
