सोशल मीडिया का जाल

आकाश की उंगलियां स्क्रीन पर तेजी से चल रही थीं। उसकी आंखें दो घंटे से इंस्टाग्राम की चमकदार दुनिया में समाई हुई थीं। एक तरफ उसके दोस्त समुद्र किनारे छुट्टियां मना रहे थे, दूसरी तरफ कोई सहपाठी नई कार के साथ पोस्ट कर रहा था, तो किसी अन्य ने इंटर्नशिप का सर्टिफिकेट चस्पा कर दिया था। हर स्क्रॉल के साथ आकाश के मन में एक कसक उभरती – “सब आगे निकल रहे हैं, बस मैं ही पीछे रह गया हूं।”

परदे के पीछे की कहानी कुछ और थी। समुद्र जाने वाले दोस्त के पिता का व्यवसाय डूब रहा था। नई कार वाले ने तो सिर्फ किराए पर ली थी फोटो खींचवाने के लिए। और इंटर्नशिप वाला लड़का रोज आठ घंटे की थकाऊ यात्रा करता था। पर आकाश को तो बस वह चमकती हुई छवि दिखाई देती, जिसने उसकी तुलना का पैमाना बना लिया था।

धीरे-धीरे आकाश वास्तविक दुनिया से कटने लगा। कॉलेज के प्रोजेक्ट में मन नहीं लगता। दोस्तों से मिलने का आनंद फीका पड़ गया। उसकी पूरी खुशी अब ‘लाइक्स’ और ‘व्यूज’ के आंकड़ों पर निर्भर थी। एक दिन उसने अपनी असली भावना – परीक्षा का डर – शेयर किया, तो सिर्ढ्ढ दो-तीन लाइक मिले। अगले दिन किसी और की नकल करते हुए ‘कूल’ अंदाज में फोटो डाली, तो सौ लाइक बरस पड़े। उसने सीख लिया – असली होना यहां महत्वपूर्ण नहीं, दिखावा ही सब कुछ है।

मोड़ तब आया जब उसकी बहन नीता ने उसे अपने बचपन का ऐल्बम दिखाया। एक फोटो में आकाश मिट्टी में सने, चेहरे पर मस्ती की चमक लिए हंस रहा था। “भैया, यह असली खुशी है,” नीता ने कहा, “तुम्हारे फोटो में अब वह चमक कहां है?”

आकाश ने उस रात सोचा – उसने अपनी असली हंसी, असली उदासी, असली संघर्ष सब कुछ एक अदृश्य जाल में फंसा दिया था। उसने फैसला किया – एक दिन का ‘डिजिटल डिटॉक्स’। पहले घंटे बेचैनी हुई, फिर धीरे-धीरे उसने किताबें निकालीं, गिटार बजाया, परिवार से बातें कीं। शाम को पार्क में टहलते हुए उसे एहसास हुआ – हवा का झोंका, पक्षियों की चहक, दोस्तों की हंसी… ये ‘नोटिफिकेशन’ से कहीं ज्यादा मीठे थे।

अगले दिन आकाश ने वापस लॉग इन किया, पर इस बार एक नए नजरिए से। उसने एक पोस्ट लिखी – “कम्पेरिजन की जगह कंटेंटमेंट। दिखावे की जगह सच्चाई।” हैशटैग के स्थान पर उसने लिखा – “#असल_जिंदगी_यहीं_है।”

सोशल मीडिया एक जाल है, यह तभी सच होता है जब हम उसमें स्वयं को फंसा लेते हैं। सच तो यह है कि असली कनेक्शन स्क्रीन पर नहीं, आंखों में मिलते हैं। और असली सफलता दूसरों को देखकर नहीं, अपने सफर को महत्व देने में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *