लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक के बाद एक सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले SIR के जरिए लोगों के वोट के अधिकार को खत्म करने का आरोप लगा और अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर भी रोक लगाने का आरोप है।
दिल्ली के सेंट्रल इलाके में इंटरनेट बंद किए जाने और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि हजारों लोगों को पकड़कर वहां से हटाया गया और उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने भी नहीं दिया गया।
प्रदर्शनकारी SIR को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जुटना चाहते थे। लेकिन उन्हें तय प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोक दिया गया।
सवाल ये है कि अगर लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, तो फिर उन्हें प्रदर्शन करने से क्यों रोका जा रहा है?
वोट लोकतंत्र की ताकत है और अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना भी लोकतांत्रिक अधिकार है। अगर जनता के वोट और विरोध—दोनों पर सवाल खड़े होने लगें, तो फिर लोकतंत्र में आम आदमी की आवाज आखिर बचेगी कहां?
जंतर-मंतर की ओर बढ़ते लोगों को रोकने की ये तस्वीरें अब बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।

