हम उस सोच के सिपाही हैं, जिसने आजाद भारत की नींव रखी। गांधी, नेहरू, अंबेडकर, मौलाना आजाद और सरदार पटेल—इन नेताओं ने हमें सिर्फ आजादी नहीं दी, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और बराबरी का रास्ता दिखाया।
आज अगर देश में लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो हम चुप बैठने वाले नहीं हैं।
हम घर नहीं बैठेंगे और न ही सरकार को मनमानी करने देंगे।
हमारा सवाल किसी एक व्यक्ति या किसी एक पार्टी से नहीं है। सवाल उस व्यवस्था से है, जिसमें आम आदमी की आवाज सुनी जानी चाहिए। जनता का वोट उसकी ताकत है और अपनी बात रखने का अधिकार उसका लोकतांत्रिक हक।
हम सड़क पर इसलिए हैं क्योंकि हमें अपने लोकतंत्र पर भरोसा है। हम सवाल इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि संविधान हमें सवाल पूछने का अधिकार देता है।
ये लड़ाई किसी कुर्सी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की है।
और जब तक ये सवालों के जवाब नहीं मिलते, आवाज उठती रहेगी।
न हम घर बैठेंगे, न सरकार को बैठने देंगे।

