किसानों की किस्मत का सवाल
मोहन सिंह का हाथ मिट्टी में था, पर नजरें सरकारी कार्यालय के उस कागज पर टिकी थीं जिस पर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य छपा था। धान की बालियाँ भारी थीं, पर उनकी कीमत हल्की थी। साल भर की मेहनत, पसीना और उम्मीदें… सब एक आंकड़े में सिमटकर रह गई थीं। सवेरे चार बजे उठना,…
