लोकगीतों की जीवित विरासत: शिवनारायण चौधरी

शिवनारायण चौधरी, यह नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गाँव की लोक-संस्कृति की जीवित धरोहर का प्रतीक है। बीते 60 वर्षों से वे गाँव-गाँव घूमकर लोकगीत गा रहे हैं। खेतों की मेड़ों, मेलों की रौनक, शादी-ब्याह के आँगन और फसल कटाई की थकान, हर जगह उनकी आवाज़ ने लोगों के दिलों को जोड़ा है।…

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बरलाई सहकारी शक्कर कारखाने की जमीन निजी हाथों में देने से किसान नाराज़ दी आंदोलन की चेतावनी

मध्यप्रदेश के सांवेर तहसील की बरलाई शुगर मिल वर्ष 1974-75 में आसपास के गांवों के किसानों ने अपनी मेहनत की कमाई से 1000 रुपये देकर शेयर लिया था और इस सहकारी शक्कर कारखाने की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस दौर में किसानों को भरोसा दिलाया गया था कि यह मिल उनके भविष्य को…

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गाँव की बेटियाँ: बदलाव की नई तस्वीर

कभी जिस गाँव में महिलाओं की दुनिया घर की चारदीवारी तक सीमित मानी जाती थी, आज उसी गाँव की महिलाएँ बदलाव की सबसे मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं। सुबह का सूरज निकलते ही अब सिर्फ़ चूल्हा नहीं जलता, बल्कि सपनों की लौ भी तेज़ हो जाती है। सर पर घूँघट जरूर है, लेकिन आँखों में…

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जब साँस लेना भी लग्ज़री बन जाए

दस साल पहले की बात है। हर सुबह सूरज निकलने से पहले मैं अपने जूते बाँधती थी और खुद को कार्टर रोड की तरफ जाते हुए पाती थी। समुद्र की ठंडी हवा मेरे चेहरे से टकराती थी, जैसे कोई चुपचाप हौसला दे रहा हो। वही हवा थी, जिसने मुझे इस शहर से और दौड़ने से…

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भारत गांव में बसता है… गांव चला जाय…

यह वीडियो सीरीज टीम पगडंडी की गांव को करीब से जानने की एक पहल है, हम दिखाना चाहते हैं आज के समय में गांव कहां पहुंचे हैं, गांव की संस्कृति, शिक्षा, खेल, किसान,ऐसे तमाम विषयों पर हमारा फोकस रहेगा। यह पहला एपीसोड है जो की गांव रतनखेड़ी मध्य प्रदेश से है। उम्मीद करते हैं आप…

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उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप की हत्या

ये उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप हैं, सच दिखा रहे थे, मार दिए गए। भ्रष्टाचार और अस्पतालों की बदहाली उजागर कर रहे थे। इसके बाद से उन्हें धमकियाँ मिलनी शुरू हो गई थीं। कुछ दिन से लापता थे, जोशियाडा बैराज से उनका शव मिला है। पत्नी का साफ आरोप है, “ये हादसा नहीं, उन धमकियों…

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गाँवों में बढ़ता हार्ट अटैक, शुगर और बीपी: एक गंभीर चेतावनी

कभी यह माना जाता था कि हार्ट अटैक, डायबिटीज़ (शुगर) और हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) जैसी बीमारियाँ केवल शहरों तक सीमित हैं, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब गाँवों में भी इन बीमारियों के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जो लोग खेतों में मेहनत करते थे और प्राकृतिक जीवन जीते थे, वही अब…

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ऑफिस के बढ़ते प्रेशर ने ली जान!

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस का बढ़ता काम का दबाव लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रहा है। लगातार टारगेट का प्रेशर, लंबे समय तक काम करना और पर्याप्त आराम न मिल पाना अब सिर्फ थकान नहीं, बल्कि जान का खतरा बनता जा रहा है। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले…

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गाँव से शहर तक – यादों की गठरी

सुबह का धुंधलका था। पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा वह आख़िरी बार अपने गाँव को देख रहा था। मिट्टी की सोंधी खुशबू, कुएँ से खींचे पानी की आवाज़, और माँ के आँगन में बिखरे तुलसी के पत्ते, सब कुछ उसकी आँखों में उतर आया। शहर जाना उसकी मजबूरी थी, पर गाँव छोड़ना उसके दिल…

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सोशल मीडिया का जाल

आकाश की उंगलियां स्क्रीन पर तेजी से चल रही थीं। उसकी आंखें दो घंटे से इंस्टाग्राम की चमकदार दुनिया में समाई हुई थीं। एक तरफ उसके दोस्त समुद्र किनारे छुट्टियां मना रहे थे, दूसरी तरफ कोई सहपाठी नई कार के साथ पोस्ट कर रहा था, तो किसी अन्य ने इंटर्नशिप का सर्टिफिकेट चस्पा कर दिया…

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