1992 का वो समय… और रघुनाथ काका की ब्रेड

सुबह की चाय या तो सूखी रोटी के साथ होती थी, या फिर पराठा–पूरी के संग। गाँव में हर चीज़ आसानी से नहीं मिलती थी।और तभी, भोपु के बीच एक आवाज़ गूँजती—“ब्रेड ले लो…” बस, इतना सुनते ही दिल धड़क उठता।नंगे पाँव दौड़ पड़ते थे हम सब… रघुनाथ काका की ब्रेड लेने। रघुनाथ काका…हर मौसम…

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हर उम्र में बदलती हुई एक फ़िल्म

एक फ़िल्म, तीन हिस्से और एक ज़िंदगी बचपन से “मेरा नाम जोकर” फ़िल्म से मेरी क़रीबी रही है. यह क़रीबी किसी एक बार देखने से नहीं बनी, बल्कि धीरे-धीरे, उम्र के साथ गहरी होती चली गई. मेरे पिता ने मेरे जन्मदिन पर मुझे इस फ़िल्म की सीडी लाकर दी थी. उस सीडी में फ़िल्म तीन हिस्सों…

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लोकगीतों की जीवित विरासत: शिवनारायण चौधरी

शिवनारायण चौधरी, यह नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गाँव की लोक-संस्कृति की जीवित धरोहर का प्रतीक है। बीते 60 वर्षों से वे गाँव-गाँव घूमकर लोकगीत गा रहे हैं। खेतों की मेड़ों, मेलों की रौनक, शादी-ब्याह के आँगन और फसल कटाई की थकान, हर जगह उनकी आवाज़ ने लोगों के दिलों को जोड़ा है।…

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गाँव से शहर तक – यादों की गठरी

सुबह का धुंधलका था। पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा वह आख़िरी बार अपने गाँव को देख रहा था। मिट्टी की सोंधी खुशबू, कुएँ से खींचे पानी की आवाज़, और माँ के आँगन में बिखरे तुलसी के पत्ते, सब कुछ उसकी आँखों में उतर आया। शहर जाना उसकी मजबूरी थी, पर गाँव छोड़ना उसके दिल…

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अभिनेत्री मधुबाला के किस्से कहानियां…

भारतीय सिनेमा की बेहद खूबसूरत अदाकारा मधुबाला के जीवन से जुड़े कुछ किस्से कहानियां, कैसे खूबसूरत अभिनेत्री का कॅरियर रहा, प्यारा में दिल टुटा, फिर बीमारी से हारी इन सभी बातों को जानने के लिए यह वीडियो जरूर देखें।

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मिलिए TVF की चर्चित वेब सीरीज ‘संदीप भैया’ के प्रिंस मिश्रा यानि की पुनीत तिवारी से

झारखण्ड के रहने वाले अभिनेता पुनीत तिवारी ने TVF की वेब सीरीज ‘संदीप भैया’ में प्रिन्स मिश्रा का मजेदार किरदार निभाया है प्रिंस मिश्रा को बड़ा सराहा जा रहा है…

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शब्दों के जादूगर: शैलेन्द्र का फिल्मी सफर 

शैलेन्द्र—हिंदी सिनेमा के वो गीतकार जिनके बोल सीधे दिल में उतर जाते हैं। राज कपूर से लेकर शंकर-जयकिशन तक, हर महान संगीतकार के साथ शैलेन्द्र ने यादगार गीत रचे।, इस 5 मिनट की वीडियो में जानिए उनके जीवन की कुछ झलक, करियर की शुरुआत, संघर्ष, सफलता और वो अमर गीत जो आज भी लोगों के…

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हिन्दी भाषी प्रदेश झूठ और भ्रम की जकड़ में है

हिन्दी भाषी प्रदेश झूठ और भ्रम की इतनी जकड़ में है कि ताजमहल को हिंदू मंदिर मानने जैसा अजीबोगरीब भ्रम भी सच मान लेगा। 2014 के बाद का भारत तथ्य और वास्तविकता से पूरी तरह कट चुका है। ऐसे माहौल में परेश रावल जैसे सदाबहार और बहुमुखी अभिनेता का अपने करियर को इन प्रचारपूर्ण फ़िल्मों…

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शानदार ख़बर: ‘होमबाउंड’ ऑस्कर की शॉर्टलिस्ट में शामिल

Homebound एक फ़िल्म नहीं, एक एहसास है। बहुत संवेदनशील, बहुत भावुक, ख़ासकर उन परिवारों के लिए जिनके बच्चे संघर्ष कर रहे हैं। जब ज़िंदगी में लगे सब खत्म हो रहा है, तब Homebound के किरदार उम्मीद याद दिलाते हैं। देखिए, महसूस कीजिए।

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