हंसराज मंडलोई: संघर्ष की बुलंद आवाज़

हंसराज मंडलोई कोई चमक-दमक वाला राजनीतिक चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे उस आम आदमी की आवाज़ हैं जो रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझता है। उनकी राजनीति सत्ता की कुर्सी से नहीं, सड़क से शुरू होती है—वहीं से, जहाँ सवाल उठते हैं और जवाब मांगने पड़ते हैं। हंसराज ने हमेशा आम लोगों के मुद्दों को प्राथमिकता…

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गाँव से शहर तक – यादों की गठरी

सुबह का धुंधलका था। पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा वह आख़िरी बार अपने गाँव को देख रहा था। मिट्टी की सोंधी खुशबू, कुएँ से खींचे पानी की आवाज़, और माँ के आँगन में बिखरे तुलसी के पत्ते, सब कुछ उसकी आँखों में उतर आया। शहर जाना उसकी मजबूरी थी, पर गाँव छोड़ना उसके दिल…

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मिलिए TVF की चर्चित वेब सीरीज ‘संदीप भैया’ के प्रिंस मिश्रा यानि की पुनीत तिवारी से

झारखण्ड के रहने वाले अभिनेता पुनीत तिवारी ने TVF की वेब सीरीज ‘संदीप भैया’ में प्रिन्स मिश्रा का मजेदार किरदार निभाया है प्रिंस मिश्रा को बड़ा सराहा जा रहा है…

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लखन पटेल: एक ऐसा सरपंच जिसे राजनीती नहीं, ‘जन-नीति’ में यकीन है

ग्राम डकाच्या के सरपंच लखन पटेल का नाम सुनते ही मन में एक ऐसे व्यक्ति की छवि उभरती है, जो छल-प्रपंच की राजनीति से कोसों दूर, सादगी और ईमानदारी की मिसाल कायम करते हैं। उनकी पहचान सत्ता के दिखावे या नेतागिरी के अहंकार से नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े सेवाभाव और गाँव के प्रति समर्पण से बनती है। लखन पटेल…

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एमपी में कफ सिरप पीने से 20 बच्चों की मौत

एमपी में कफ सिरप पीने से 20 बच्चों की मौत के मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी के मालिक एस. रंगनाथन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें चेन्नई की अदालत में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर छिंदवाड़ा लाया जाएगा।

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6:37 की शाम — सेजल उर्फ़ बुलबुल, एक रहस्य

शाम के ठीक 6 बजकर 37 मिनट। टाटा शोरूम से 21 साल की युवती सेजल अपनी ड्यूटी खत्म कर बाहर निकलती है। घर में सभी उसे प्यार से बुलबुल कहते हैं। उस दिन सेजल ने सिर दर्द और बेचैनी की शिकायत की थी। यह सुनकर मैनेजर ने उसे घर जाने की अनुमति दे दी और…

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भारत गांव में बसता है… गांव चला जाय…

यह वीडियो सीरीज टीम पगडंडी की गांव को करीब से जानने की एक पहल है, हम दिखाना चाहते हैं आज के समय में गांव कहां पहुंचे हैं, गांव की संस्कृति, शिक्षा, खेल, किसान,ऐसे तमाम विषयों पर हमारा फोकस रहेगा। यह पहला एपीसोड है जो की गांव रतनखेड़ी मध्य प्रदेश से है। उम्मीद करते हैं आप…

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1992 का वो समय… और रघुनाथ काका की ब्रेड

सुबह की चाय या तो सूखी रोटी के साथ होती थी, या फिर पराठा–पूरी के संग। गाँव में हर चीज़ आसानी से नहीं मिलती थी।और तभी, भोपु के बीच एक आवाज़ गूँजती—“ब्रेड ले लो…” बस, इतना सुनते ही दिल धड़क उठता।नंगे पाँव दौड़ पड़ते थे हम सब… रघुनाथ काका की ब्रेड लेने। रघुनाथ काका…हर मौसम…

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लोकगीतों की जीवित विरासत: शिवनारायण चौधरी

शिवनारायण चौधरी, यह नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गाँव की लोक-संस्कृति की जीवित धरोहर का प्रतीक है। बीते 60 वर्षों से वे गाँव-गाँव घूमकर लोकगीत गा रहे हैं। खेतों की मेड़ों, मेलों की रौनक, शादी-ब्याह के आँगन और फसल कटाई की थकान, हर जगह उनकी आवाज़ ने लोगों के दिलों को जोड़ा है।…

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