वोट चोर’ कहे जा रहे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार पर देश के सैकड़ों जनप्रतिनिधियों की आवाज रोकने का आरोप लग रहा है।
विपक्ष का कहना है कि आज जब सांसद जनता की आवाज लेकर सड़क पर उतरना चाहते हैं, तो उन्हें रोकने के लिए दिल्ली में पुलिस का पहरा लगा दिया गया। सवाल सीधा है—अगर सब कुछ साफ है, तो फिर जनप्रतिनिधियों को जनता तक अपनी बात पहुंचाने से रोका क्यों जा रहा है?
विपक्ष का आरोप है कि मोदी-शाह की सरकार लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। सांसदों का कहना है कि यह सिर्फ किसी एक नेता या पार्टी का सवाल नहीं है, बल्कि देश के हर उस नागरिक का सवाल है, जो अपने वोट की ताकत से सरकार चुनता है।
आज सवाल सिर्फ ज्ञानेश कुमार का नहीं है। सवाल ये है कि क्या सत्ता से सवाल पूछना भी अब गुनाह हो गया है?
अगर जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की आवाज ही सड़क पर रोक दी जाएगी, तो फिर लोकतंत्र में जनता की आवाज आखिर सुनेगा कौन?
यही वजह है कि विपक्ष इसे लोकतंत्र और जनता के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बता रहा है।

