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“सर, ये मेरी आख़िरी राइड है… और आप आख़िरी सवारी।”

सर, मैं आपकी लोकेशन पर आ गया हूँ, आप कहाँ हैं?

मैं बोला, 1 मिनट में आया। मैं झट से उसके पास पहुँच गया। उसने पिन पूछा, पिन डालते ही राइड शुरू हो गई। मैं हेलमेट लगाकर बैठ गया। मामूली सा आगे बढ़े ही थे कि उसे कॉल आया। वो गाड़ी रोककर बात करने लगा। बात खत्म भी नहीं हुई थी और वो रोने लगा।

मैं भी थोड़ा सहम गया। डरते हुए पूछा, भाई, क्या बात हो गई? क्यों रो रहे हो? वो बोला, कुछ नहीं। मुझसे रहा न गया, मैंने दोबारा पूछा, घर में सब ठीक है? तब उसने रुआँसे गले से कहा, सर, पत्नी का फोन था। कह रही है आप रेलवे में TT बन गए हैं, आपका जॉइनिंग लेटर आया है, तुरंत घर आ जाइए। सब आपका इंतज़ार कर रहे हैं।

मैं पहले चौका, फिर दोबारा उससे पूछा। तब उसने विस्तार से बताया, यह मेरा पहला अटेम्प्ट था। इससे पहले मैंने CISF के लिए ट्राय किया था, मगर गॉल ब्लैडर के ऑपरेशन की वजह से रिजेक्ट हो गया था।

अगले ही पल मेरे मन में सवाल आया, रैपिडो कब से चला रहे हो? बोला, वैसे मैं बीटेक सिविल इंजीनियर हूँ, एक फर्म में काम करता हूँ। साथ में फ्री टाइम में रैपिडो भी चलाता हूँ, ताकि मेरा खर्चा चले और समय का उपयोग हो सके। घर बैठना अच्छा नहीं लगता। दिल्ली में रहता हूँ।

मेरी पढ़ाई दिल्ली के सरकारी स्कूल से हुई है। माता-पिता के साथ पत्नी और 7 साल की बिटिया है। सर, बतौर रैपिडो कैप्टन ये मेरी आख़िरी राइड है। आपको छोड़कर सीधे घर जाऊँगा। सब बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

पत्नी ने बताया है कि आपकी पोस्टिंग हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर होगी, और यहाँ से साउथ जाने वाली गाड़ी में बतौर TT ज़िम्मेदारी मिली है। 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद साउथ कि गाड़ी के साथ जाऊँगा। मुझे साउथ घूमना बहुत पसंद है। वहाँ के लगभग सारे मंदिर घूम चुका हूँ। हालांकि मैं भगवान में यकीन नहीं करता, मगर मंदिर मुझे अच्छे लगते हैं।

वैसे मैं रोज़ रैपिडो से ही ऑफिस आता-जाता हूँ। लोग अपनी-अपनी कहानियाँ सुनाते हैं, संघर्ष, परेशानियाँ, अधूरे सपने… मैं भी सुन लेता हूँ, थोड़ा-बहुत बाँट लेता हूँ। लेकिन आज पहली बार किसी की कहानी सुनकर लगा कि मेहनत सच में रंग लाती है, बस देर लगती है।

उसकी आवाज़ में जो कंपन था, वो सिर्फ़ खुशी का नहीं था… वो सालों की ठोकरों, रिजेक्शन और उम्मीदों के ज़िंदा बच जाने की आवाज़ थी। पता नहीं क्यों, उसकी खुशी सुनते-सुनते मेरी आँखें भी भर आईं। शायद इसलिए कि हम सब अपनी-अपनी लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं… और जब कोई जीतता है, तो थोड़ा-सा हम भी जीत जाते हैं।

अब हम मेरे ऑफिस के सामने पहुँच चुके थे, मैं उतरा… उसने मुस्कुराकर कहा

“सर, ये मेरी आख़िरी राइड है… और आप मेरी आख़िरी सवारी।”

मेरी रिक्वेस्ट पर, हरित की इजाज़त लेकर, ऑफिस के गार्ड भैया ने हमारी तस्वीर ली।

आप हरित की कहानी से क्या सीखते हैं, ये आप जानें, मुझे तो हरित बहुत कुछ सीखा गया।

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