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लखन पटेल: एक ऐसा सरपंच जिसे राजनीती नहीं, ‘जन-नीति’ में यकीन है

ग्राम डकाच्या के सरपंच लखन पटेल का नाम सुनते ही मन में एक ऐसे व्यक्ति की छवि उभरती है, जो छल-प्रपंच की राजनीति से कोसों दूर, सादगी और ईमानदारी की…

हंसराज मंडलोई: संघर्ष की बुलंद आवाज़

हंसराज मंडलोई कोई चमक-दमक वाला राजनीतिक चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे उस आम आदमी की आवाज़ हैं जो रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझता है। उनकी राजनीति सत्ता की कुर्सी से…

लोकगीतों की जीवित विरासत: शिवनारायण चौधरी

शिवनारायण चौधरी, यह नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गाँव की लोक-संस्कृति की जीवित धरोहर का प्रतीक है। बीते 60 वर्षों से वे गाँव-गाँव घूमकर लोकगीत गा रहे हैं।…

शहर में बढ़ता प्रदूषण

रोहित ने सुबह खिड़की खोली तो सांस लेने में दिक्कत हुई। बाहर का नज़ारा धुंधला था, जैसे किसी ने पूरे शहर पर मटमैला चश्मा चढ़ा दिया हो। आसमान नीला नहीं,…

नशे की जकड़ में गाँव की जवानी

रामू की उम्र सिर्फ उन्नीस साल थी, लेकिन उसकी आँखों में जवानी की चमक नहीं, एक धुंधली सूनापन था। गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे, जहाँ कभी बच्चे…

किसानों की किस्मत का सवाल

मोहन सिंह का हाथ मिट्टी में था, पर नजरें सरकारी कार्यालय के उस कागज पर टिकी थीं जिस पर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य छपा था। धान की बालियाँ भारी…

गाँवों में बढ़ता हार्ट अटैक, शुगर और बीपी: एक गंभीर चेतावनी

कभी यह माना जाता था कि हार्ट अटैक, डायबिटीज़ (शुगर) और हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) जैसी बीमारियाँ केवल शहरों तक सीमित हैं, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब गाँवों…

सोशल मीडिया का जाल

आकाश की उंगलियां स्क्रीन पर तेजी से चल रही थीं। उसकी आंखें दो घंटे से इंस्टाग्राम की चमकदार दुनिया में समाई हुई थीं। एक तरफ उसके दोस्त समुद्र किनारे छुट्टियां…

गाँव की बेटियाँ: बदलाव की नई तस्वीर

कभी जिस गाँव में महिलाओं की दुनिया घर की चारदीवारी तक सीमित मानी जाती थी, आज उसी गाँव की महिलाएँ बदलाव की सबसे मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं। सुबह का…

पंचायत चुनाव: लोकतंत्र निभाएँ, रिश्ते न बिगाड़ें

गाँव की पहचान सिर्फ़ खेत-खलिहान, मिट्टी और मेहनत से नहीं होती, बल्कि आपसी रिश्तों, भाईचारे और सहयोग से होती है। लेकिन दुर्भाग्य से जब गाँव में पंचायत चुनाव आते हैं,…