गांव–देश

जब साँस लेना भी लग्ज़री बन जाए

दस साल पहले की बात है। हर सुबह सूरज निकलने से पहले मैं अपने जूते बाँधती थी और खुद को कार्टर रोड की तरफ जाते हुए पाती थी। समुद्र की…

भारत में ChatGPT का बढ़ता असर: 10 करोड़ वीकली यूजर्स के साथ बना दूसरा सबसे बड़ा बाजार

ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पहले बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भारत में हर हफ्ते करीब 10 करोड़ लोग चैटजीपीटी का…

बरलाई सहकारी शक्कर कारखाने की जमीन निजी हाथों में देने से किसान नाराज़ दी आंदोलन की चेतावनी

मध्यप्रदेश के सांवेर तहसील की बरलाई शुगर मिल वर्ष 1974-75 में आसपास के गांवों के किसानों ने अपनी मेहनत की कमाई से 1000 रुपये देकर शेयर लिया था और इस…

डिजिटल दुनिया में उलझे गांव, असल रिश्ते हो रहे कमजोर

आज गांवों की गलियों में जो बदलाव सबसे तेज़ी से दिख रहा है, उसकी वजह मोबाइल फोन है। कभी गांवों की पहचान आपसी मेल-जोल, भरोसे और रिश्तों की मज़बूती से…

वायरल से गुमनामी तक: ‘दिल ना दिया’ गाकर मशहूर हुआ पिंटू, अब इलाज की आस में

सोशल मीडिया पर रातों-रात चमकने वाले चेहरों की दुनिया उतनी ही बेरहम भी है। जो नाम कल तक हर स्क्रीन पर छाया रहता है, वही आज भीड़ के शोर में…

राहुल पटेल: मेहनत, स्वाभिमान और सवाल पूछने की हिम्मत

मध्य प्रदेश के इंदौर से लगे गांव डकाच्या के राहुल पटेल कोई बड़ा नेता नहीं है, न ही किसी बड़े मंच का चेहरा। वह एक आम युवक है, जिसने एमबीए…

जोशी सर: चार दशक की शिक्षा, सेवा और संस्कारों की मिसाल

ग्राम डकाच्या में पिछले 40 वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे हेमंत जोशी केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक पूरे गाँव की यादों, संस्कारों और भविष्य का हिस्सा हैं।…

लखन पटेल: एक ऐसा सरपंच जिसे राजनीती नहीं, ‘जन-नीति’ में यकीन है

ग्राम डकाच्या के सरपंच लखन पटेल का नाम सुनते ही मन में एक ऐसे व्यक्ति की छवि उभरती है, जो छल-प्रपंच की राजनीति से कोसों दूर, सादगी और ईमानदारी की…

शहर में बढ़ता प्रदूषण

रोहित ने सुबह खिड़की खोली तो सांस लेने में दिक्कत हुई। बाहर का नज़ारा धुंधला था, जैसे किसी ने पूरे शहर पर मटमैला चश्मा चढ़ा दिया हो। आसमान नीला नहीं,…

नशे की जकड़ में गाँव की जवानी

रामू की उम्र सिर्फ उन्नीस साल थी, लेकिन उसकी आँखों में जवानी की चमक नहीं, एक धुंधली सूनापन था। गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे, जहाँ कभी बच्चे…