भारत में युवा अब सिर्फ सोशल मीडिया पर अपनी पसंद-नापसंद बताने वाली पीढ़ी नहीं रह गए हैं। वे सड़क पर उतरकर सवाल भी पूछ रहे हैं। पहले Gen Z के छात्र परीक्षा, पेपर लीक, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन करते दिखाई दिए, अब इसका असर Gen Alpha तक पहुंचता नजर आ रहा है। देश के कई राज्यों में स्कूली बच्चे भी अपनी मूलभूत सुविधाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में Gen Alpha से जुड़े छात्र आंदोलनों की खबरें सामने आई हैं। कहीं बच्चे स्कूल में शिक्षक, पंखे और शौचालय की मांग कर रहे हैं तो कहीं पीने के पानी, सड़क और खेल के मैदान जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि इन बच्चों ने विरोध करना अपनी पिछली पीढ़ियों से नहीं, बल्कि इंटरनेट और Gen Z के आंदोलनों से भी सीखा है। सोशल मीडिया ने उन्हें यह समझने का रास्ता दिया है कि अगर स्थानीय स्तर पर शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है तो अपनी आवाज को सार्वजनिक किया जा सकता है।
फतेहपुर में करीब 1500 छात्रों के प्रदर्शन का मामला इसका उदाहरण है। छात्रों ने पानी, शौचालय और पंखे जैसी सुविधाओं को लेकर कई घंटे प्रदर्शन किया और प्रशासन को उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन देना पड़ा।
Gen Z के आंदोलन का आधार भी काफी हद तक यही असंतोष रहा है। परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, रोजगार के अवसर और शिक्षा के भविष्य को लेकर युवाओं में नाराजगी बढ़ी। हालिया आंदोलन ने सरकार पर इतना दबाव बनाया कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद युवाओं की राजनीतिक ताकत पर देशभर में चर्चा शुरू हो गई।
लेकिन Gen Z और Gen Alpha के इन आंदोलनों को सिर्फ सरकार विरोधी आंदोलन मानना शायद सही तस्वीर नहीं होगी। असली सवाल यह है कि युवा आखिर मांग क्या रहे हैं?
एक छात्र को अच्छी शिक्षा चाहिए। उसे परीक्षा में पारदर्शिता चाहिए। उसे यह भरोसा चाहिए कि उसकी मेहनत किसी पेपर लीक या व्यवस्था की गलती से बर्बाद नहीं होगी। छोटे बच्चे चाहते हैं कि जिस स्कूल में वे पढ़ने जाते हैं, वहां कम से कम शिक्षक, पानी, शौचालय और सुरक्षित भवन जैसी सुविधाएं तो हों।
यानी आंदोलन का केंद्र राजनीति से ज्यादा भविष्य है।
इस पीढ़ी की एक और खासियत है। यह पुराने तरीके से चुपचाप शिकायत करने के बजाय तुरंत सवाल करती है। वीडियो बनाती है, पोस्ट डालती है, मीम बनाती है और अपनी बात को हजारों लोगों तक पहुंचा देती है। Gen Z के हालिया आंदोलन में मीम, व्यंग्य और डिजिटल कंटेंट ने भी बड़ी भूमिका निभाई।
यही वजह है कि सरकारें भी अब युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और कैंपस संवाद पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
आने वाले समय में यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र के लिए बड़ा संकेत हो सकता है। आज जो बच्चे स्कूल के पंखे, पानी और शिक्षक के लिए सवाल पूछ रहे हैं, कल वही रोजगार, महंगाई, शिक्षा और शासन को लेकर बड़े सवाल पूछेंगे।
इसलिए इन आंदोलनों को केवल बच्चों का गुस्सा समझकर नजरअंदाज करना आसान रास्ता हो सकता है, लेकिन समझदारी शायद इसमें है कि इन आवाजों के पीछे छिपी समस्याओं को सुना जाए।
क्योंकि Gen Z और Gen Alpha सिर्फ नई पीढ़ियां नहीं हैं। ये ऐसी पीढ़ियां हैं जो सवाल पूछना सीख चुकी हैं और अब जवाब मांगना भी सीख रही हैं।

