शहर में बढ़ता प्रदूषण
रोहित ने सुबह खिड़की खोली तो सांस लेने में दिक्कत हुई। बाहर का नज़ारा धुंधला था, जैसे किसी ने पूरे शहर पर मटमैला चश्मा चढ़ा दिया हो। आसमान नीला नहीं, भूरे-पीले रंग में डूबा हुआ था। दूर के इमारतों के किनारे धुंध में मिल रहे थे। सड़क पर निकला तो गला खराब होने लगा। वाहनों…
