गाँव की बेटियाँ: बदलाव की नई तस्वीर
कभी जिस गाँव में महिलाओं की दुनिया घर की चारदीवारी तक सीमित मानी जाती थी, आज उसी गाँव की महिलाएँ बदलाव की सबसे मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं। सुबह का सूरज निकलते ही अब सिर्फ़ चूल्हा नहीं जलता, बल्कि सपनों की लौ भी तेज़ हो जाती है। सर पर घूँघट जरूर है, लेकिन आँखों में…
