ब्रेकिंग न्यूज़

राहुल पटेल: मेहनत, स्वाभिमान और सवाल पूछने की हिम्मत

मध्य प्रदेश के इंदौर से लगे गांव डकाच्या के राहुल पटेल कोई बड़ा नेता नहीं है, न ही किसी बड़े मंच का चेहरा। वह एक आम युवक है, जिसने एमबीए की पढ़ाई की, लेकिन नौकरी के पीछे भागने की बजाय ईमानदारी से मेहनत का रास्ता चुना। आज वह पोहे की एक छोटी-सी दुकान लगाकर अपने…

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इंदौर में दूषित पानी से 35 की मौत, 212 भर्ती

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। गंदा पानी पीने के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं और अब तक 35 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना ने शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी…

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जोशी सर: चार दशक की शिक्षा, सेवा और संस्कारों की मिसाल

ग्राम डकाच्या में पिछले 40 वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे हेमंत जोशी केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक पूरे गाँव की यादों, संस्कारों और भविष्य का हिस्सा हैं। बच्चे हों या अभिभावक—सब उन्हें स्नेह और सम्मान से “जोशी सर” के नाम से जानते हैं। उनकी पहचान किसी पद या पुरस्कार से नहीं, बल्कि…

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लखन पटेल: एक ऐसा सरपंच जिसे राजनीती नहीं, ‘जन-नीति’ में यकीन है

ग्राम डकाच्या के सरपंच लखन पटेल का नाम सुनते ही मन में एक ऐसे व्यक्ति की छवि उभरती है, जो छल-प्रपंच की राजनीति से कोसों दूर, सादगी और ईमानदारी की मिसाल कायम करते हैं। उनकी पहचान सत्ता के दिखावे या नेतागिरी के अहंकार से नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े सेवाभाव और गाँव के प्रति समर्पण से बनती है। लखन पटेल…

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हंसराज मंडलोई: संघर्ष की बुलंद आवाज़

हंसराज मंडलोई कोई चमक-दमक वाला राजनीतिक चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे उस आम आदमी की आवाज़ हैं जो रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझता है। उनकी राजनीति सत्ता की कुर्सी से नहीं, सड़क से शुरू होती है—वहीं से, जहाँ सवाल उठते हैं और जवाब मांगने पड़ते हैं। हंसराज ने हमेशा आम लोगों के मुद्दों को प्राथमिकता…

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लोकगीतों की जीवित विरासत: शिवनारायण चौधरी

शिवनारायण चौधरी, यह नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गाँव की लोक-संस्कृति की जीवित धरोहर का प्रतीक है। बीते 60 वर्षों से वे गाँव-गाँव घूमकर लोकगीत गा रहे हैं। खेतों की मेड़ों, मेलों की रौनक, शादी-ब्याह के आँगन और फसल कटाई की थकान, हर जगह उनकी आवाज़ ने लोगों के दिलों को जोड़ा है।…

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शहर में बढ़ता प्रदूषण

रोहित ने सुबह खिड़की खोली तो सांस लेने में दिक्कत हुई। बाहर का नज़ारा धुंधला था, जैसे किसी ने पूरे शहर पर मटमैला चश्मा चढ़ा दिया हो। आसमान नीला नहीं, भूरे-पीले रंग में डूबा हुआ था। दूर के इमारतों के किनारे धुंध में मिल रहे थे। सड़क पर निकला तो गला खराब होने लगा। वाहनों…

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नशे की जकड़ में गाँव की जवानी

रामू की उम्र सिर्फ उन्नीस साल थी, लेकिन उसकी आँखों में जवानी की चमक नहीं, एक धुंधली सूनापन था। गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे, जहाँ कभी बच्चे खेलते थे और बुजुर्ग गप्पें मारते थे, अब नशे के अड्डे बन गए थे। शाम ढलते ही वहाँ इकट्ठा होने वाली नौजवान टोली की बातों…

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किसानों की किस्मत का सवाल

मोहन सिंह का हाथ मिट्टी में था, पर नजरें सरकारी कार्यालय के उस कागज पर टिकी थीं जिस पर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य छपा था। धान की बालियाँ भारी थीं, पर उनकी कीमत हल्की थी। साल भर की मेहनत, पसीना और उम्मीदें… सब एक आंकड़े में सिमटकर रह गई थीं। सवेरे चार बजे उठना,…

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गाँवों में बढ़ता हार्ट अटैक, शुगर और बीपी: एक गंभीर चेतावनी

कभी यह माना जाता था कि हार्ट अटैक, डायबिटीज़ (शुगर) और हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) जैसी बीमारियाँ केवल शहरों तक सीमित हैं, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब गाँवों में भी इन बीमारियों के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जो लोग खेतों में मेहनत करते थे और प्राकृतिक जीवन जीते थे, वही अब…

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