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लोकगीतों की जीवित विरासत: शिवनारायण चौधरी

शिवनारायण चौधरी, यह नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गाँव की लोक-संस्कृति की जीवित धरोहर का प्रतीक है। बीते 60 वर्षों से वे गाँव-गाँव घूमकर लोकगीत गा रहे हैं। खेतों की मेड़ों, मेलों की रौनक, शादी-ब्याह के आँगन और फसल कटाई की थकान, हर जगह उनकी आवाज़ ने लोगों के दिलों को जोड़ा है।…

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शहर में बढ़ता प्रदूषण

रोहित ने सुबह खिड़की खोली तो सांस लेने में दिक्कत हुई। बाहर का नज़ारा धुंधला था, जैसे किसी ने पूरे शहर पर मटमैला चश्मा चढ़ा दिया हो। आसमान नीला नहीं, भूरे-पीले रंग में डूबा हुआ था। दूर के इमारतों के किनारे धुंध में मिल रहे थे। सड़क पर निकला तो गला खराब होने लगा। वाहनों…

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नशे की जकड़ में गाँव की जवानी

रामू की उम्र सिर्फ उन्नीस साल थी, लेकिन उसकी आँखों में जवानी की चमक नहीं, एक धुंधली सूनापन था। गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे, जहाँ कभी बच्चे खेलते थे और बुजुर्ग गप्पें मारते थे, अब नशे के अड्डे बन गए थे। शाम ढलते ही वहाँ इकट्ठा होने वाली नौजवान टोली की बातों…

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किसानों की किस्मत का सवाल

मोहन सिंह का हाथ मिट्टी में था, पर नजरें सरकारी कार्यालय के उस कागज पर टिकी थीं जिस पर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य छपा था। धान की बालियाँ भारी थीं, पर उनकी कीमत हल्की थी। साल भर की मेहनत, पसीना और उम्मीदें… सब एक आंकड़े में सिमटकर रह गई थीं। सवेरे चार बजे उठना,…

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गाँवों में बढ़ता हार्ट अटैक, शुगर और बीपी: एक गंभीर चेतावनी

कभी यह माना जाता था कि हार्ट अटैक, डायबिटीज़ (शुगर) और हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) जैसी बीमारियाँ केवल शहरों तक सीमित हैं, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब गाँवों में भी इन बीमारियों के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जो लोग खेतों में मेहनत करते थे और प्राकृतिक जीवन जीते थे, वही अब…

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सोशल मीडिया का जाल

आकाश की उंगलियां स्क्रीन पर तेजी से चल रही थीं। उसकी आंखें दो घंटे से इंस्टाग्राम की चमकदार दुनिया में समाई हुई थीं। एक तरफ उसके दोस्त समुद्र किनारे छुट्टियां मना रहे थे, दूसरी तरफ कोई सहपाठी नई कार के साथ पोस्ट कर रहा था, तो किसी अन्य ने इंटर्नशिप का सर्टिफिकेट चस्पा कर दिया…

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गाँव की बेटियाँ: बदलाव की नई तस्वीर

कभी जिस गाँव में महिलाओं की दुनिया घर की चारदीवारी तक सीमित मानी जाती थी, आज उसी गाँव की महिलाएँ बदलाव की सबसे मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं। सुबह का सूरज निकलते ही अब सिर्फ़ चूल्हा नहीं जलता, बल्कि सपनों की लौ भी तेज़ हो जाती है। सर पर घूँघट जरूर है, लेकिन आँखों में…

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पंचायत चुनाव: लोकतंत्र निभाएँ, रिश्ते न बिगाड़ें

गाँव की पहचान सिर्फ़ खेत-खलिहान, मिट्टी और मेहनत से नहीं होती, बल्कि आपसी रिश्तों, भाईचारे और सहयोग से होती है। लेकिन दुर्भाग्य से जब गाँव में पंचायत चुनाव आते हैं, तो यही रिश्ते सबसे ज़्यादा परीक्षा में पड़ जाते हैं। जो लोग कल तक एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे, वही चुनाव के…

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गाँव से शहर तक – यादों की गठरी

सुबह का धुंधलका था। पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा वह आख़िरी बार अपने गाँव को देख रहा था। मिट्टी की सोंधी खुशबू, कुएँ से खींचे पानी की आवाज़, और माँ के आँगन में बिखरे तुलसी के पत्ते, सब कुछ उसकी आँखों में उतर आया। शहर जाना उसकी मजबूरी थी, पर गाँव छोड़ना उसके दिल…

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भारत गांव में बसता है… गांव चला जाय…

यह वीडियो सीरीज टीम पगडंडी की गांव को करीब से जानने की एक पहल है, हम दिखाना चाहते हैं आज के समय में गांव कहां पहुंचे हैं, गांव की संस्कृति, शिक्षा, खेल, किसान,ऐसे तमाम विषयों पर हमारा फोकस रहेगा। यह पहला एपीसोड है जो की गांव रतनखेड़ी मध्य प्रदेश से है। उम्मीद करते हैं आप…

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